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शनिवार, 29 सितंबर 2018

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एक सांसद को कितना रुपया और फंड मिलता है ? mp ko kitna rupya milta hai

नमस्कार मेरा नाम अंकित त्रिपाठी है आज हम बात करेंगे की एक सांसद को ठंड कितना मिलता है उस के क्या क्या अधिकार होते हैं वह फंड का कहां-कहां यूज़ कर सकता है तो आइए जानते हैं

सांसद निधि योजना के बारे में

सांसद निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा चलायी गयी योजना है जिसमें सांसदों (लोक सभाराज्य सभा और मनोनीत) को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष वितीय सहायता दी जाती है. सांसद निधि योजना की शुरुआत 23 दिसंबर 1993 को पी. वी. नरसिंहा राव के प्रधानमन्त्री रहते शुरू किया गया था.

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फरवरी 1994 तक MPLAD योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय के नियंत्रण में थी लेकिन अक्टूबर 1994 में इसे "सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय" को स्थानांतरित कर दिया गया था.
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सांसद निधि योजना

वर्ष 1993-94 मेंजब यह योजना शुरू की गईतो सहायता राशि मात्र 5 लाख/सांसद थी लेकिन 1998-99 से इस राशि को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया और वर्तमान में इस योजना के तहत मिलने वाली राशि 5 करोड़ रुपये कर दी गयी है.

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राशि को कौन खर्च करता है?

इस योजना की राशि सांसद के खाते में नहीं बल्कि सम्बंधित जिले के जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / डिप्टी कमिश्नर या नोडल अधिकारी के खाते में 2.5 करोड़ रुपये की दो किस्तों (वित्त वर्ष के शुरू होने के पहले) में भेजी जाती है. सांसदजिलाधिकारी को बताता है कि उसे जिले में कहाँ-कहाँ इस राशि का उपयोग करना है.

MPLAD योजना में कौन से कार्य कराये जाते हैं?

MPLADS योजना के तहत मिली राशि को सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में स्थानीय लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सार्वजानिक हित के कार्यों जैसे शिक्षापेयजलस्वास्थ्यस्वच्छतासड़कलाइब्रेरी इत्यादि में खर्च करता है.
इसके अलावा स्थानीय आवश्यकताओं के हिसाब से भी कार्यों के निर्माण पर खर्च किया जाता है. MPLADS फण्ड से मुख्य रूप से टिकाऊ संपत्तियों (durable ssets) का निर्माण कराया जाता है हालाँकि कुछ नियमों के अनुसार बिना टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण भी कराया जा सकता है.

MPLAD के कार्यों में प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़चक्रवातसुनामीभूकंपहिमस्खलनबादल विस्फोटकीट हमलेभूस्खलनबवंडरसूखाआगरासायनिकजैविक और रेडियोलॉजिकल खतरे को भी शामिल किया सकता है.

MPLAD योजना की अन्य विशेषताएं;

1. इस योजना की धनराशि को लोकसभा सांसदों को अपने "चुनाव क्षेत्र" में कहीं भी और राज्यसभा सांसदों को अपने "राज्य में" कहीं भी और मनोनीत सांसदों को "देश भर में" कहीं भी विकास कार्यों के लिए आवंटित कर सकता है.

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2. संसद सदस्यजिस जिले को नोडल जिले के रूप में चुनता है इसकी सूचना सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय” के साथ-साथ राज्य सरकार और उस जिले के जिलाधिकारी को देनी होती है.

3. यदि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र एक से अधिक जिले में फैला हुआ है तो संसद सदस्य को किसी भी एक जिले को अपने नोडल जिले के रूप में चुनना होता है.

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4. किसी एक सोसाइटी या ट्रस्ट के सम्पूर्ण जीवनकाल में एक या एक से अधिक कार्यों पर MPLAD फंड से 50 लाख रुपये से अधिक नहीं खर्च किया जा सकता है. यदि कोई सोसाइटी/ट्रस्ट पहले ही 50 लाख से अधिक का खर्च प्राप्त कर चुकी है तो उसे और अधिक धन नहीं दिया जा सकता है. हालाँकि वित्त वर्ष 2012-13 से इस राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया है.

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5. MPLAD स्कीम के तहत किसी भी योजना के लिए स्वीकृत राशि 1 लाख रुपये से कम की नहीं होनी चाहिए. हालांकियदि जिला प्राधिकरण का मानना है कि कम राशि का कामजनता के लिए फायदेमंद होगा तो वह उसे मंजूरी दे सकता है भले ही काम की लागत 1 लाख से कम की हो.

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ऊपर दिए गए तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि जनता द्वारा जो भी प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजा जाता है उसे इतनी वित्तीय सहायता सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है कि वह अपने लोगों की सहायता कर सके.
कुछ समय से सरकार इस योजना में दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 25 करोड़ और धनराशि को खर्च करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी से हटाकर किसी और अधिकारी को सौंपने पर विचार कर रही है क्योंकि जिलाधिकारी कई अन्य कामों में व्यस्त रहता है इस कारण कई बार MPLAD का फंड तय समय में खर्च नहीं हो पाता है.

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